शब्द नहीं पास कैसे, विनय सुनाऊं मैं। पंख नहीं पास कैसे, पास चली आऊं मैं ॥ ऐसा कोई त्याग कहां, योग अनुराग कहां। आपको बुला लूं प्रभु, ऐसा मेरा भाग्य कहां ॥ मन की व्यथा को किस, भाषा में सुनाऊं मैं ॥ पंख नहीं पास कैसे, पास चली आऊं मैं ॥ मीरा जैसा प्यार नहीं, करुण पुकार नहीं। आपको रिझाऊं ऐसा…
भाग्य बड़े सदगुरू मैं पायो, मन की दुविधा दूर नशाई ।। बाहर ढूंढ फिरा मैं जिसको, सो वस्तु घट भीतर पाई ।। सकल जून जीवन के माही, पूरण ब्रह्म ज्योति दर्शाई ।। जनम जनम के बन्धन काटे, चौरासी लख त्रास मिटाई ।। ब्रह्मानन्द चरण बलिहारी, गुरु महिमा हरि से अधिकाई ।।
दर्शन दो घनश्याम नाथ मेरी अंखियां प्यासी रे । मन मंदिर का दीप जला दो घट-घट बासी रे ।। मंदिर मंदिर मूरत तेरी, फिर भी न देखी सूरत तेरी । युग बीते ना आई मिलन की, पूर्णमासी रे ।। द्वार दया का जब तू खोले, पंचम स्वर में गूंगा बोले । अंधा देखे लंगड़ा चल कर, पहुंचे काशी रे ।। द्वार खड़ा तेरा …
ये जग अंधा मै केही समझाऊं ।। एक दो होय उन्हें समझाऊं, सभी भुलाना पेट का धंधा ।। पानी के घोड़ा पवन असवरवा, ढरकि परे जस ओस का बुंदा ।। गहरी नदिया अगम बहे धरवा, खेवनहार के पड़ी गया फंडा ।। घट की वस्तु नजर नहीं आवत, दीया वारी ढूंढत है अंधा ।। लग गयी आग सकल बन जारीगा, बिन गुरु ज्ञान भटकियां …
हम तो सत्य नाम व्योपारी ।। कोई कोई लादें कासा पीतल, कोई कोई लौंग सुपारी । हम तो लाधो नाम धनी को, पूरण खेप हमारी ।। पूंजी न टूटे नफा चौगुना, बनीज कियो हम भारी । हाट जगाती रोक न सकीहैं, निर्भय गैल हमारी ।। मोती बूंद घटहि में उपजे, सुकृत भरत भंडारी । नाम पदारथ लाद चाल्यो है, "धरमदास&…
तू सुमिरन कर ले मेरे मना, तेरी बीती उमर हरि नाम बिना ।। पंछी पंख बिन, हस्ती दन्त बिन, नारी पुरुष बिना । वेश्या पुत्र पिता बिन हीना, तैसे प्राणी हरि नाम बिना ।। देह नैन बिन, रैन चन्द्र बिन, धरती मेघ बिना । जैसे पंडित वेद बिहूना, तैसे प्राणी हरि नाम बिना ।। कूप निर बिनु, धनु छीर बिन, मंदि…
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