है बहारें बागे दुनिया चन्द रोज। देख लो ! इसका तमाशा चन्द रोज।। ऐ मुसाफिर कुच का सामान कर, इस जहां में है बसेरा चन्द रोज।। पूछा लुकमा से जिया तू कितने रोज,  दस्ते हसरत मल के बोला चन्द रोज।। बादे मदफन कब्र में बोली कजा, अब यहां पर सोते रहना चन्द रोज।। क्यों सताते हो दिले बेजुर्म को,  जालि…