शब्द नहीं पास कैसे, विनय सुनाऊं मैं। पंख नहीं पास कैसे, पास चली आऊं मैं ॥ ऐसा कोई त्याग कहां, योग अनुराग कहां। आपको बुला लूं प्रभु, ऐसा मेरा भाग्य कहां ॥ मन की व्यथा को किस, भाषा में सुनाऊं मैं ॥ पंख नहीं पास कैसे, पास चली आऊं मैं ॥ मीरा जैसा प्यार नहीं, करुण पुकार नहीं। आपको रिझाऊं ऐसा…