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फ़रवरी, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गुरु की मूरत मन में ध्याना

गु रु की मूरत मन में ध्याना। गुरु के शब्द मंतर मन माना॥ गुरु के चरण हृदय लै धारो। गुरु पारब्रह्म सदा नमस्कारो॥ मत कोई भरम भूलो संसारी। गुरु बिन कोई न उतरसि पारी॥ भूले को गुरु मारग पाया। अवर तियाग हरि भक्ति लाया॥ जन्म मरण की त्रास मिटाई। गुरु पूरे की बे-अंत बड़ाई॥ जिन्ह पाया तिन्ह गुरु ते …

पंख नहीं पास कैसे...

शब्द नहीं पास कैसे, विनय सुनाऊं मैं। पंख नहीं पास कैसे, पास चली आऊं मैं ॥ ऐसा कोई त्याग कहां, योग अनुराग कहां। आपको बुला लूं प्रभु, ऐसा मेरा भाग्य कहां ॥ मन की व्यथा को किस, भाषा में सुनाऊं मैं ॥ पंख नहीं पास कैसे, पास चली आऊं मैं ॥ मीरा जैसा प्यार नहीं, करुण पुकार नहीं। आपको रिझाऊं ऐसा…