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शब्द नहीं पास कैसे, विनय सुनाऊं मैं। पंख नहीं पास कैसे, पास चली आऊं मैं ॥ ऐसा कोई त्याग कहां, योग अनुराग कहां। आपको बुला लूं प्रभु, ऐसा मेरा भाग्य कहां ॥ मन की व्यथा को किस, भाषा में सुनाऊं मैं ॥ पंख नहीं पास कैसे, पास चली आऊं मैं ॥ मीरा जैसा प्यार नहीं, करुण पुकार नहीं। आपको रिझाऊं ऐसा…
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ऊधो मोहे संत सदा अति प्यारे
ऊधो मोहे संत सदा अति प्यारे | जाकि महिमा वेद उचारे || मेरे कारण छोड जगत के भोग पदारथ सा…
पंख नहीं पास कैसे...
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हरि भजन बिना सुख नाहीं
हरि भजन बिना सुख नाहीं रे । नर क्यों बिरथा भटकाई रे ।। काशी गया द्वारका जावे, चार धाम …
गुरु की मूरत मन में ध्याना
गु रु की मूरत मन में ध्याना। गुरु के शब्द मंतर मन माना॥ गुरु के चरण हृदय लै धारो। गुरु पा…
ये जग अंधा मै केही समझाऊं
ये जग अंधा मै केही समझाऊं ।। एक दो होय उन्हें समझाऊं, सभी भुलाना पेट का धंधा ।। पानी के…