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हमारे गुरु ने दीनी अमृत नाम जड़ी ।। काटे से कटत नाही, जारे से जरत नाही, निशदिन रहत हरि ।। यह तो जड़ी मोहे प्यारी लागे, अमृत रस से भरी ।। काया नगर में अधर एक बंगला, ता में गुप्त धरी ।। पांच नाम पच्चीस नागिनी, सूचत तुरत मरी ।। इस काली ने सब जग खाया, सदगुरु देख डरी ।। कहे कबीर सुनो भाई स…
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ऊधो मोहे संत सदा अति प्यारे
ऊधो मोहे संत सदा अति प्यारे | जाकि महिमा वेद उचारे || मेरे कारण छोड जगत के भोग पदारथ सा…
ये जग अंधा मै केही समझाऊं
ये जग अंधा मै केही समझाऊं ।। एक दो होय उन्हें समझाऊं, सभी भुलाना पेट का धंधा ।। पानी के…
पंख नहीं पास कैसे...
शब्द नहीं पास कैसे, विनय सुनाऊं मैं। पंख नहीं पास कैसे, पास चली आऊं मैं ॥ ऐसा कोई त्याग…
हरि भजन बिना सुख नाहीं
हरि भजन बिना सुख नाहीं रे । नर क्यों बिरथा भटकाई रे ।। काशी गया द्वारका जावे, चार धाम …
गुरु की मूरत मन में ध्याना
गु रु की मूरत मन में ध्याना। गुरु के शब्द मंतर मन माना॥ गुरु के चरण हृदय लै धारो। गुरु पा…