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पंख नहीं पास कैसे...


 

शब्द नहीं पास कैसे,

विनय सुनाऊं मैं।


पंख नहीं पास कैसे,

पास चली आऊं मैं ॥


ऐसा कोई त्याग कहां,

योग अनुराग कहां।

आपको बुला लूं प्रभु,

ऐसा मेरा भाग्य कहां ॥


मन की व्यथा को किस,

भाषा में सुनाऊं मैं ॥


पंख नहीं पास कैसे,

पास चली आऊं मैं ॥


मीरा जैसा प्यार नहीं,

करुण पुकार नहीं।

आपको रिझाऊं ऐसा,

कोई उपकार नहीं ॥


तेरी बन जाऊं ऐसी,

समझ कहां पाऊं मैं ॥


पंख नहीं पास कैसे,

पास चली आऊं मैं ॥


अपना इशारा दे दो,

चरणों में गुजारा दे दो।

द्वार पर भिखारी आया,

तुम्हें छोड़ गुरुवर मेरे,

थोड़ा सा सहारा दे दो,

और कहां जाऊं मैं ॥


पंख नहीं पास कैसे,

पास चली आऊं मैं ॥



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