शब्द नहीं पास कैसे,
विनय सुनाऊं मैं।
पंख नहीं पास कैसे,
पास चली आऊं मैं ॥
ऐसा कोई त्याग कहां,
योग अनुराग कहां।
आपको बुला लूं प्रभु,
ऐसा मेरा भाग्य कहां ॥
मन की व्यथा को किस,
भाषा में सुनाऊं मैं ॥
पंख नहीं पास कैसे,
पास चली आऊं मैं ॥
मीरा जैसा प्यार नहीं,
करुण पुकार नहीं।
आपको रिझाऊं ऐसा,
कोई उपकार नहीं ॥
तेरी बन जाऊं ऐसी,
समझ कहां पाऊं मैं ॥
पंख नहीं पास कैसे,
पास चली आऊं मैं ॥
अपना इशारा दे दो,
चरणों में गुजारा दे दो।
द्वार पर भिखारी आया,
तुम्हें छोड़ गुरुवर मेरे,
थोड़ा सा सहारा दे दो,
और कहां जाऊं मैं ॥
पंख नहीं पास कैसे,
पास चली आऊं मैं ॥

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